Union Budget

यूपीएससी प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के लिए आर्थिक सर्वेक्षण कैसे पढ़ें?

 

सिविल सेवा परीक्षा के लिये आर्थिक सर्वेक्षण का महत्व


आर्थिक सर्वेक्षण का अध्ययन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार तीनो चरणों के लिए आवश्यक है। प्रारंभिक परीक्षा में आर्थिक सर्वेक्षण के विवरण के अधार पर सीधे सवाल पूछे जाते हैं। यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा में पूछे गए अर्थशास्त्र से संबंधित 15-20 प्रश्नों में से लगभग आधे प्रश्न आर्थिक सर्वेक्षण पर अधारित होते हैं। मुख्य परीक्षा के सभी

(Key Highlights) Union Budget 2023-24

Union Budget 2023-24

The budget for FY24 continued with the government's vision of complementing the macro-economic level growth focus with a micro-economic and all-inclusive welfare emphasis. The government had been facing a tough choice to provide a spending push in a slowing global environment without compromising

Important Points of Economic Survey, 2017-18

Highlights of Economic Survey, 2017-18


The Department of Economic Affairs, Finance Ministry of India presents the Economic Survey in the parliament every year, just before the Union Budget. It is prepared under the guidance of the office of Chief Economic Adviser, Finance Ministry. It is the Ministry's view on the annual economic development of the country. The Economic Survey reviews the developments in the Indian Economy over the previous 12 months, summarizes the performance

आर्थिक सर्वेक्षण का सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में क्या योगदान है।

यूपीएससी परीक्षा की तैयारी में आर्थिक सर्वेक्षण की भूमिका

सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में आर्थिक सर्वेक्षण का योगदान प्रत्येक उम्मीदवार समझता है और यहां, इस लेख में हम यह जानेंगे कि यह कब जारी किया जाता है, आर्थिक सर्वेक्षण क्या होता है, इसे कौन जारी करता है, यह कैसे काम करता है, और यूपीएससी परीक्षा के वर्तमान मामलों की तैयारी में यह एक उपयोगी भूमिका निभाता है।

आर्थिक सर्वेक्षण क्या है?

  • आर्थिक सर्वेक्षण वित्त मंत्रालय, भारत सरकार का एक प्रमुख वार्षिक

आर्थिक समीक्षा 2017-18 : भारतीय अर्थव्यवस्था पर दस नए तथ्य

आर्थिक समीक्षा 2017-18 : अर्थव्यवस्था की स्थितिः विश्लेषणात्मक सिंहावलोकन और नीतिगत संभावनाएं


1. पंजीकृत अप्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष करदाताओं में भारी वृद्धि हुई है।

  • जीएसटी पद्धति पूर्व (चित्रा 1क) की तुलना में जीएसटी के अंतर्गत विशिष्ट अप्रत्यक्ष करदाताओं में 50 प्रतिशत वृद्धि हुई।
  • इसी प्रकार से, नवम्बर, 2016 तक  (चित्र 1ख) व्यक्तिगत आयकर पफाइल करने वाले व्यक्तियों में लगभग 1.8 मिलियन की वृद्धि (रुझान वृद्धि से अधिक) रही है।

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